Monday, 17 August 2015

वैज्ञानिक

वैज्ञानिक

वैज्ञानिक अर्थात वह व्यक्ति जिसने विज्ञान का गहन अध्ययन तथा कोई नए खोज किया हो। वैज्ञानिक, मानवों में श्रेष्ठतम होता है। अपने बुद्धि, कौशल और सामर्थ्य से वह समाज और देश को नयी दिशा प्रदान करता है। वैज्ञानिकों ने इस पृथ्वी को अधिकतम मानव के अनुकूल बनाया है।

     हम प्रतिदिन अनेकों सामग्रियों का उपयोग करते हैं, ये सारी सामग्रियों किसी न किसी रूप में वैज्ञानिक खोज का ही परिणाम है। चाहे घर में जलने वाला बल्ब हो या खाना पकाने का चूल्हा अथवा आधुनिक वाहन सब वैज्ञानिकों की ही देन है। प्रांरभिक मानव वनों में रहता था और कच्चा मांस, फल-फूल खाकर जीवित रहता था, लेकिन किसी वैज्ञानिक सोच के व्यक्ति ने आग का और फिर चाक का आविष्कार किया। इससे मानव का जीवन ही बादल गया। कालांतर में खेती की खोज ने स्थायी रूप से रहने और घर बनाने को उन्हें प्रेरित किया। इस तरह समय बीतता गया और अनेक खोज किए गए।

     गैलीलियो, न्यूटन, मार्कोनी, अल्फ्रेड नोबेल, आइन्स्टाइन, राइट ब्रदर्स, जगदीश चन्द्र बसु जैसे हजारों वैज्ञानिकों ने अपने आविष्कारों से दुनिया को अधिक से अधिक सुविधा जनक बना दिया है। टीवी, कम्प्युटर, मोबाइल, आधुनिकतम वाहन, प्रकाश के विविध बल्ब, एयर कंडीशनर आदि ने मानव को स्वर्ग तुल्य सुविधाओं से परिपूर्ण कर दिया है।  गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव हो गया है अथवा प्रयास जारी हैं। मानव अंग-प्रत्यारोपन आज आम बात हो गयी है। घर बैठे हम दुनिया भर का ज्ञान अर्जित कर पा रहे हैं। ये सब हजारों वैज्ञानिकों और उनकी खोजों का ही परिणाम है।


     वैज्ञानिकों को ईश्वर तुल्य माना गया है, इसके बावजूद भी उनके कुछ कृत्य आज समस्त मानव जाति के लिए खतरा साबित हो गया है। हथियारों की होड़ ने आधुनिकतम और हिंसक हथियारों को जन्म दिया है। परमाणु बम, हाइड्रोजन बम, मिसाइल आदि से लोगों के प्राण का खतरा उत्पन्न हो गया है। आधुनिक हथियारों तथा बम का प्रयोग आतंकवादी आतंक फैलाने के लिए कर रहे हैं। इससे मानवता शर्मशार हो रही है। इस तरह ये आविष्कार वरदान बनाने के बजाय अभिशाप बन गए हैं। अतः आज के वैज्ञानिकों को अपने नए आविष्कारों की खोज के दौरान इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि वे ऐसे आविष्कारों से बचे जिससे भविष्य में मानव जाति को खतरा हो। उन्हें समाज के लिए उपयोगी आविष्कारों पर ध्यान देना चाहिए। इससे देश और समाज मे वो सदा के लिए अमर हो जाएंगे। देश को ऐसे वैज्ञानिकों कि जरूरत है जिससे देश उन्नति के पथ पर अग्रसर हो सके। 

Friday, 24 July 2015

विज्ञान की उपलब्धियां

विज्ञान की क्रांतिकारी उपलब्धियां

जब भी विज्ञान शब्द की बात होती है लोग आधुनिक आविष्कारों के बारे में सोचने लगते हैं लेकिन इसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। विज्ञान प्रकृति के हर वस्तु में विद्यमान है। विज्ञान संसार की सबसे अनमोल उपलब्धि है।

जब मानव विज्ञान से परिचित नहीं था, उसका जीवन पशु के समान था। मानव पशुओं की भांति जंगलों और गुफाओं में रहता था। भोजन के रूप में फल-फूल, कंद-मूल एवं पशुओं का शिकार करके प्रयोग करता था। मांस को कच्चा ही खाता था। इन सब के कारण वे हमेशा अनेक रहस्यमयी बीमारियों से पीड़ित रहते थे और उनकी अकाल मृत्यु भी हो जाती थी। लेकिन विज्ञान के प्रयोगों ने मानव को पशु से मानव बना दिया। उनका जीवन सुंदर हो गया।
विज्ञान के ज्ञान से मानव ने सर्वप्रथम आग का आविष्कार किया। यह मानव की सबसे बड़ी खोज थी जिसने उसके जीवन को पूरी तरह से बदल कर रख दिया। अब वह कच्चा मांस खाने के बजाय उसे भून कर खाने लगा इससे बीमारियों का खतरा कम हो गया। अंधेरे में पशुओं के डर से मुक्ति मिली। अब वो गुफाओं में रात के अंधेरे पर विजय पा चुके थे। कालांतर में उन्होने आग से जंगलों को साफ करने की तकनीक सीखी और खेती करना शुरू किया इससे उनके घुमंतू जीवन का अंत हुआ और वे अब स्थायी रूप से एक जगह घर बना कर रहने लगे।
विज्ञान की उपलब्धियों के अगले चक्र में चाक का आविष्कार हुआ जिसने मनुष्यों के जीवन को गति दी। इससे वह अब बैलगाड़ी जैसे वाहन बनाकर लंबी दूरियाँ अपने सामानों के साथ तय कर सकता था। आज मनुष्यों ने विज्ञान के मदद से हर क्षेत्र में पैठ बना ली है। आज कोई चीज असंभव नहीं रही। गंभीर से गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है। रेफ्रीजरेटर, एसी, आधुनिक वाहन, कम्प्युटर, टीवी, टेलीफ़ोन व मोबाइल आदि ने हमारी जिंदगी को बदल कर रख दिया है। कृत्रिम सामग्रियों की भरमार है। मानव अंग तक विकसित कर लिए गए हैं। चाँद पर घर बनाने की बात हो रही है। मौसम पर या तो विजय पा ली गयी है या प्रयास किया जा रहा है। पहले ये माना जाता था की पृथ्वी के चारों ओर सूर्य घूमती है लेकिन न्यूटन ने प्रमाणित कर दिखाया की सूर्य स्थिर है और पृथ्वी उसके चारों ओर घूमती है जिससे मौसम बदलता है और दिन रात होता है। ये बातें विज्ञान के ज्ञान से पहले बकवास थी।
विज्ञान ने हमारे जीवन को इतना सुलभ कर दिया है कि हमारे लिए कुछ भी असंभव नहीं रह गया है। आस से 100 वर्ष पहले यदि कोई ये कहता कि मोबाइल जैसी कुछ चीज़ होगी और इससे घर बैठे हजारों किमी दूर बैठे लोगों से संवाद कर सकते हैं और उन्हें देख सकते हैं तो सब हमारा मज़ाक उड़ाते। लेकिन आज 3जी के माध्यम से और इंटरनेट के माध्यम से घर बैठे अपने परिचितों से संवाद संभव है।

जब तक चाँद पर मानव के कदम नहीं पड़े थे तो वह एक पहेली के समान थी। लेकिन आज हमने वहाँ अपने कदम रख लिए हैं। अगला कदम मंगल ग्रह की ओर है। भारत ने सफलतापूर्वक अन्तरिक्ष में मंगल यान को स्थापित कर संसार में भारत का लोहा मनवाया है।
पूरे विश्व में अनेकों आविष्कार किए जा रहे हैं। कृत्रिम अंग प्रत्यारोपन आम बात होती जा रही है। हजारों आदमियों का काम चोटी सी मशिन कर रही है। कुछ बातें हैं जो रहस्य बनी हुई हैं लेकिन निकट भविष्य में उसका भी हल ढूंढ लिया जाएगा।

उपरोक्त चीजें विज्ञान की उपलब्धियों का ही तो बखान करती है। आज हम अपना जीवन विज्ञान से हटकर सोच भी नहीं सकते। हालांकि इससे प्रकृति के साथ खिलवाड़ हुआ है और उसे नुकसान पहुँच रहा है, लेकिन आशा है की हमारे वैज्ञानिक इसका भी समाधान ढूंढ लेंगे।





Friday, 29 August 2014

कम्प्युटर


कम्प्युटर

      कम्प्युटर का आविष्कार मानव की सबसे अद्भूत उपलब्धि थी। वैसे तो मानव द्वारा अनेक प्रकार के आविष्कार किए गए और हर आविष्कार अपने महत्व से जाना हटा है, अपितु कम्प्युटर के आविष्कार ने पूरे विश्व की कायाकल्प ही कर दी।

      आज के दौड़ती भागती जिंदगी में कम्प्युटर मानवीय जीवन का एक अभिन्न अंग बन चुका है। सुबह से लेकर रात तक हम अपने कार्यकलापों पर नजर डालें तो पाएंगे कि कम्प्युटर के आगमन ने किस प्रकार हमारे जीवन को सुलभ, रोमांचकारी और आनंददायी बना दिया है। वैसे तो कम्प्युटर का सर्वाधिक प्रयोग सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों में, कल-कारखानों में और मशीनों में होता है लेकिन साथ ही आज विद्यालयों कम्प्युटर का ज्ञान अनिवार्य कर दिया गया है। चाहे हम बैंक में पैसे जमा करने या निकालने जाए, एटीएम जाएँ, मॉल में सामान खरीदने जाएँ हर जगह कम्प्युटर आसानी से दिख जाएंगे। समय के साथ कम्प्युटर ने अपना रूप भी बदला है। पहले एनालॉग, फिर डिजिटल और अब सुपर कम्प्युटर ने बाज़ार कि रूप रेखा ही बादल दी है। इनके माध्यम ने नित्य नए खोज किए जा रहे हैं। अन्तरिक्ष में नए आयाम कायम किए जा रहे हैं। आंकड़ों का संग्रह और अपने संदेशों को विश्व के किसी भी कोने में बैठे अपने परिचित तक पहुंचाना अब चुटकी भर का काम हो गया है।  अतः आज कम्प्युटर के महत्व को हर कोई स्वीकार कर रहा है और खुद तो सीख रहा ही है अपने बच्चों और परिचितों को भी सीखने कि प्रेरणा दे रहा है।
      जैसा कि हर किसी वस्तु का अच्छा और बुरा दोनों पहलू होता है, वैसे ही  कम्प्युटर का भी बुरा पहलू भी है। कम्प्युटर के अत्यधिक प्रयोग से आँख और अस्थि संबंधी बीमारी उभरे हैं। कम्प्युटर में अनेक ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जिनके माध्यम से अपराध कि घटनाएँ घट रही है। बच्चे अपने परिवार के बजाय कम्प्युटर और इंटरनेट के माध्यम से जुड़े मित्रों के साथ समय बिताना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। बाहरी खेलों में बच्चों की रुचि कम हुई है।

      इन सब के बावजूद कम्प्युटर अपने महत्व से कम नहीं होता। दिन-व-दिन इसकी महत्ता में वृद्धि ही होगी। अतः हर व्यक्ति को कम्प्युटर सीखना चाहिए। हमें इसके बुरे प्रभाव से बचना चाहिए और जहां तक संभव हो इसका अपने उत्थान के लिए प्रयोग करना चाहिए।

Thursday, 27 February 2014

दीपावली

दीपावली
दीपावली दीपों का त्योहार है। प्रतिवर्ष पूरे भारत सहित विश्व को कोने-कोने में हिन्दू धर्मावलम्बियों द्वारा इस पर्व को पूरे हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। इस त्योहार का हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्व है। इसे प्रकाश का त्योहार भी कहा जाता है। प्रतिवर्ष आश्विन मास की अमावश्या को दीप जलाकर और पटाखे छोड़ कर इसका आनंद लेते हैं।
दीपावली क्यों मनाया हटा है इसके पीछे अनेक पौराणिक कथाएँ प्रचलित हैं। इनमें से एक प्रसिद्ध कथा है की जब भगवान राम, रावण के वध के पश्चात अयोध्या लौटे तो वो दिन अमावश्या का था। अतः लोगों ने अपने प्रिय राम के स्वागत और अंधेरे को दूर भागने के लिए पूरे अयोध्या को दीपों से प्रज्वलित कर दिया था। अतः ये प्रथा तब से चलने लगी। एक अन्य मान्यता के अनुसार इसी दिन धन और संपन्नता की देवी लक्ष्मी, राजा बाली के चंगुल से आजाद हुई थी। चंद कलेंडर के अनुसार इस दिन को हिन्दू कलेंडर की प्रारम्भिक तिथि अर्थात पहली तारीख भी मानी जाती है। अतः लोग इन मान्यताओं के अनुसार पूरे हर्षोउल्लास के साथ देश-विदेश के विभिन्न भागों में दीपावली मानते हैं।
दीपावली के आने से कुछ दिनों पूर्व से ही लोग अपने घरों की साफ सफाई और रंग रोगन के कार्य में लग जाते हैं। इसके पश्चात लोग घरों पर विभिन्न प्रकार के बल्ब और रंगीन बल्ब से अपने घर बाहर सजाते हैं। घरों में रंगोलियां बनाई जाती है। अनेक प्रकार के पकवान बनाए जाते हैं। हर घर में गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा बिठाई जाती है। फूलों से घरों के प्रवेश द्वार को सजाया जाता है। दुकानदार अपने-अपने दुकानों में भी पूजन करते हैं। लोगों द्वारा सहर्ष जुआ खेला जाता है। घरों को दिये जलाकर प्रकाशित किया जाता है। बच्चे-बूढ़े सभी पटाखे छोड़ते हैं। पूरा दिन और रात सुहावना होता है।
वैसे तो दीपावली जब भी आती है लोगों में उत्सुकता और अपने घरों को नए रूप में सजाने की बेचैनी सहज ही देखी जा सकती है, लेकिन हर वर्ष देश के विभिन्न भागों में कोई न कोई दुर्घटना जरूर हो जाती है। लोगो की नासमझी और सही तरीके से पटाखे नहीं छोड़ने के कारण कई लोग पटाखों से घायल हो जाते हैं। कई बार तो खलिहान, घरों और दुकानों में पटाखों से आग लग जाती है। बच्चों को तो सबसे अधिक खतरा होता है। पटाखों के अत्यधिक प्रयोग से वातावरण भी प्रदूषित हो जाता है।
अतः हमें पर्यावरण के अनुकूल सामग्रियों से ही इस रोचक पर्व का आनंद लेना चाहिए। पटाखों के प्रयोग के समय सावधानी बरतना चाहिए। जब भी बच्चे पटाखों का प्रयोग करें, साथ में बड़े लोगों को उनका मार्गदर्शन करना चाहिए। हमें दिये, बत्ती और मिठाइयों के साथ जहां तक संभव हो इस पर्व को मनाने चाहिए।

शब्द संख्या: 322 शब्द। 

Thursday, 30 January 2014

श्री सुभाष चन्द्र बोस ‘‘एक करिश्माई व्यक्तित्व’’

श्री सुभाश चन्द्र बोस ‘‘एक करिश्माई व्यक्तित्व’’

सुभाश चन्द्र बोस भारत के महान देषभक्त थे। भारत के स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत सेनानियों में जब भी गिनती की जाएगी, इन्हें सर्वोच्च स्थान प्राप्त होगा। अद्भुत देषप्रेम एवं निश्ठा के कारण समस्त विष्व में आज भी इन्हें बड़े सम्मान के साथ याद किया जाता है। भारतवासियों को ब्रिटिष षाशकों के खिलाफ उनकी षक्ति का अहसास सर्वप्रथम इनके ही नेतृत्व में हुआ था।

सुभाश चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 ई0 को उड़ीसा राज्य के कटक नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता वहाॅं के एक प्रसिद्ध वकील थे। वे बचपन से ही एक मेघावी छात्र थे। इन्होंने दर्षनषास्त्र में प्रथम श्रेणी में प्रतिश्ठा के साथ बी0ए0 की परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च षिक्षा हेतु वे इंग्लैंड गए। वहाॅं उन्होंने सिविल सर्विसेस की परीक्षा योग्यतापूर्वक पास की और प्रथम स्थान प्राप्त किया। लेकिन भारत में ब्रिटिष सरकार की नीतियों से आहत होकर देषसेवा और राजनीति के लिए खुद को समर्पित कर दिया । अतः वे कांग्रेस में षामिल हो गए। उन्हें कलकत्ता काॅरपोरेषन का मेयर नियुक्त किया गया। आगे जाकर उन्होंने अपने व्यक्तित्व से समस्त कांग्रेस पर अमिट प्रभाव छोड़ा, जिससे वे कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित किए गए। परन्तु गाॅंधीजी से वैचारिक मतभेद होने के कारण उन्होंने अध्यक्ष पद से षीघ्र ही इस्तीफा दे दिया। उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ अहिंसा से अधिक हिंसापूर्वक आजादी प्राप्त कर लेने में विष्वास था, अतः उन्होंने फारवर्ड ब्लाॅक नामक पार्टी का गठन किया।

ब्रिटिष षासन सुभाश चंद्र बोस के कार्यों से भयभीत होने लगी थी। इस कारण इन्होंने सुभाश चंद्र जी को उनको घर पर ही नजरबन्द कर दिया, लेकिन सुभाश अंग्रेजों के आॅंखों में धूल झोंकने में कामयाब हुए और वहाॅं से भागकर अफगानिस्तान के रास्ते जर्मनी पहॅंुचे। जर्मनी में हिटलर उनसे मिलकर बहुत प्रभावित हुए और ब्रिटिष षासन के खिलाफ युद्ध में हर संभव मदद का आष्वासन दिया। इनकी और जापान की सेना की मदद से सुभाश चंद्र बोस जी ने वहाॅं आजाद हिन्द फौज जिनका गठन रासबिहारी बोस ने किया था को मजबूत किया और हजारों भारतीयों को अपनी सेना में नियुक्त किया। इस सेना का एक ही उद्देष्य था जान गॅंवाकर भी भारत की भूमि से अंग्रेजों को निकाल बाहर करना। सुभाश चंद्र बोस ने अपने सेना को नारा दिया ‘‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूॅंगा’’ और ‘‘दिल्ली चलो’’।

इनके नेतृत्व में एक विषाल फौज मयनमार के रास्ते ब्रिटिष फौज को रौंदते हुए अरूणाचल प्रदेष होते हुए मणिपुर के इम्फाल तक पहुॅंच चुकी थी। श्री बोस के इस साहसिक कदम से सम्पूर्ण ब्रिटिष षासन काॅंपने लगा था और भारत से पलायन के लिए तैयार होने लगा था, लेकिन इसी बीच श्री बोस का विमान सन् 1945 ई0 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वे लापता हो गए साथ ही जापान सहित जर्मनी की पराजय ने आजाद हिन्द फौज के कदम को विफल कर दिया। इस प्रकार एक इतिहास होते होते रह गया। उस दिन के बाद से श्री बोस को अलग-अलग जगह में देखे जाने की बात कही गई, लेकिन वे आज भी लापता हैं।

श्री सुभाश चन्द्र बोस ने अपने कार्यों से अंग्रेजों समेत समस्त विष्व को अपना लोहा मनवाया था। उनके ओजस्वी व्यक्तित्व, प्रभावषाली भाशण और अद्भुत देषप्रेम की आज भी मिसाल दी जाती है। अनगिनत देषप्रेमियों के वे आदर्ष रहे हैं। आज के युवाओं को उनसे प्रेरणा ग्रहण कर स्वयं को बदलना चाहिए।


पराधीन सपनेहूं सुख नाहीं

       
स्वाधीनता हर मनुष्य का जन्मसिद्ध अधिकार है। इसको पाने के लिए यदि मनुष्य को लड़ना भी पड़े तो सदैव तत्पर रहना चाहिए। पराधीनता वो अभिशाप है जो मनुष्य के आचार-व्यवहार उसके परिवेश, समाज, मातृभूमि और देश को गुलाम बना देते हैं, फिर चाहे तो कैसी भी गुलामी रही हो। पिंजरे में बंद पक्षी से अधिक आजादी और स्वच्छंदता का महत्व कौन समझ सकता है ?



भारत ने बहुत लंबे समय से गुलामी के शाप को सहा है। पहले वो मुगलों के अधीन रहा। उनके द्वारा उसने अनेकों अत्याचार सहे परन्तु उसकी नींव नहीं हिली। इसका मुख्य कारण था मुगल पहले आए तो लूटमार के मकसद से थे परन्तु धीरे-धीरे उन्होंने यहाँ रहना स्वीकार कर इस पर राज किया। यदि शुरु के मुगलकाल को अनदेखा कर दिया जाए तो बाकि मुस्लिम शासकों ने यहाँ की धन-संपदा का शोषण नहीं किया वो यहाँ अपना शासन चाहते थे पर लूटकर बाहर नहीं ले जाना चाहते थे। मुगलकाल के खत्म होते-होते अंग्रेज़ों ने यहाँ अपने पैर पसारने शुरु किए। पहले-पहल उन्होंने इसे व्यापार के लिए चुना परन्तु उनका उद्देश्य बहुत बाद में समझ में आया। व्यापार करते हुए उन्होंने पूरे भारत को अपने हाथों में समेटना शुरु कर दिया। उनका उद्देश्य यहाँ की अतुल धन-संपदा का शोषण कर उसे अपने देश पहुँचाने का था। उन्होंने ऐसा किया भी। भारत का विकास व उन्नति उनका उद्देश्य कभी था ही नहीं।




भारत के लोगों को जब स्थिति समझ में आई तब तक बात हाथ से निकल चुकी थी। पूरा भारत गुलामी की बेड़ियों में बंध चुका था। यहाँ के लोग उनके शोषण से पीड़ित होने लगे थे। उन्होंने यहाँ कि धन-संपदा, संस्कृति, धरोहर पर अतुल्य वार किए जिसकी छाप आज भी देखी जा सकती है। हम भारतीयों को पराधीनता की बेड़ियाँ तोड़ते आधा दशक लग गया। लोगों ने स्वतंत्रता का मूल्य पहचानना शुरु किया और अंग्रेज़ों द्वारा भयंकर यातनाएँ सही। अनेक देशभक्तों ने काल कोठरियों में अपना जीवन व्यतीत किया। कई वीरों ने हँसते.हँसते अपने प्राणों का बलिदान दिया। अतः हमें किसी भी कीमत पर अपनी आजादी को नहीं खोने देना चाहिए